हारा हूं सौ बार

हारा हूं सौ बार, गुनाहों से लडलड़कर, लेकिन बारम्बार लड़ा हूं, मैं उठ-उठ कर। इससे मेरा हर गुनाह भी मुझसे हारा, मैंने अपने जीवन को इस तरह उबारा, डूबा हूं हर रोज़, किनारे तक आ आकर। लेकिन मैं हर रोज़ उगा हूं जैसे दिनकर, इससे मेरी असफलता भी मुझसे हारी, मैने अपनी सुंदरता इस तरह... Continue Reading →

कोरोना(covid)

भंवर में फंसे हुए तो क्या हुआ, हम डूबे नहीं हैं ठहरे हुए हैं। घर-घर के दरवाजे पर, ताले नहीं पहरे पड़े हुए हैं। दरिया फिर समतल होगा, हम फिर उभर कर निकलेंगे भयानक इस भवंडर से, हम फिर तैर कर निकलेंगे। छलनी कर दिया तो क्या हुआ, कुछ पंखों के दो पर ही थे।... Continue Reading →

खाली हाथ जाते हैं लोग!!

यहाँ से खाली हाथ जाते हैं लोग, जीते जी कुछ मर जाते हैं लोग। चढ़ती जवानी पे इतना मत इतरा, आंसुओं की आंच पे गल जाते हैं लोग। भूखे जो सो जा रहे हैं वालदैन, बिगड़ी औलाद से डर जाते हैं लोग। जान पे खेल कर करते हैं वतन की रक्षा, इतिहास में दर्ज नाम... Continue Reading →

Shikva aur shikaayatein

Shikaayat mein kahin bharosa tha, shikva mein uske tootne ka darr. Shikaayat dhero labzo ki ek dhaar thi, shikva khamosh lehron ke saamne nakaam hoti ek patvaar thi. Shikaayat samajhdaari ki daal se gire sabr se ghayal thi, shikva waqt ki shaakh pe lipti umeed ki kaayal thi.Shikva aur shikaayatein

हाथ से फिसल गया वक़्त

रेत की तरह, हाथ से फिसल गया वक़्त हम बदले न बदले, पर बदल गया वक़्त गलतियों से अपनी, पाया है तजुर्बा हम संभले, और संभल गया वक़्त जैसे जैसे हम बड़े होते गए धीरे धीरे निकल गया वक़्त यारों संग कुल्हड़ में, ज़िन्दादिल थी चाय बहला गयी दिल, और बहल गया वक़्त कभी मिलाया,... Continue Reading →

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