हारा हूं सौ बार

हारा हूं सौ बार,

गुनाहों से लडलड़कर,

लेकिन बारम्बार लड़ा हूं,

मैं उठ-उठ कर।

इससे मेरा हर गुनाह भी मुझसे हारा,

मैंने अपने जीवन को इस तरह उबारा,

डूबा हूं हर रोज़,

किनारे तक आ आकर।

लेकिन मैं हर रोज़ उगा हूं जैसे दिनकर,

इससे मेरी असफलता भी मुझसे हारी,

मैने अपनी सुंदरता इस तरह सँवारी।

2 thoughts on “हारा हूं सौ बार

Add yours

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

Blog at WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: